ज़िंदगी का मतलब


बूढ़े बाबा को घेर के
बच्चों की टोली ने पूछा
बाबा कोई कहानी सुनाओ?
बाबा बोले आज कहानी नहीं
मैं तुम्हे ज़िंदगी का मतलब बताता हूँ
"हैं!! वो क्या होता है?"
बोले बच्चे

बाबा ने पहले आसमान को देखा
लंबी सांस ले शायद महसूस भी किया
फिर आँखें मूंद कर
बोलना शुरू किया

जैसे एक नदी सागर में प्रथक दिखती है
जैसे धुएें में से आग निकलती है
जैसे फलों पर पेड़ लटकते हैं
जैसे बारिश पर बादल ऊगते हैं
वैसी ही है ज़िंदगी

जैसे शाम से पहले आए रात
रात के साथ हो दिन की शुरुआत
दिन में देखें सपने खुली आँखों से
सपनों में दिखे मंज़िल सलाखों से 
वैसी ही है ज़िंदगी

जैसे सुख के ऊपर दुख
और दुख के ऊपर सुख
पीड़ा में हंसी की लहर
हंसी में किसी पीड़ा की कसक
वैसी ही है ज़िंदगी

अगड़म बगड़म
बम बम बोल बम 
अगड़म बगड़म
बम बम बोल बम 
वैसी ही है ज़िंदगी

"बाबा, ये क्या बोल रहे हो..
हमें तो कुछ समझ नहीं आ रहा
इसका तो कुछ मतलब ही नहीं निकला"
बच्चे झल्ला उठे

"Exactly!"
"यही है ज़िन्दगी!"
बाबा हँस कर बोले
और गायब हो गये! 





यादों की रोटी


मंज़िल की तलाश में जो आये हैं 
मंज़िल क्या हम पीछे छोड़ आये हैं?

ये मंज़र जो हैं बरसते आँखों में 
इन में क्यों अब तेरे ही साये हैं?

लंबा होगा सफर ये पता था 
तेरी यादों की रोटी इसलिए साथ लाये हैं.

पी वी सिंधु

Image result for pv sindhu smash
वो
एक उन्मुक्त लड़की
गिरी, उठी, सम्भली, चीखी
कभी शेर सा झपटी
कभी बादल सा गरजी
कभी ज़ोर का स्मैश लगाया
कभी फुर्ती से डिफेंस में उठाया
अंडर-डॉग जो कहते थे अब कहाँ हैं
तुमसे न होगा जो कहते थे अब कहाँ हैं
गिरी
उठी
सम्भली
चीखी

~ उड़ी ~

सोना क्या चांदी क्या
तुमने दिखाया है उड़ना क्या
तुम ऐसे ही उड़ती रहो
पी वी सिंधु
तुम ऐसे ही दिल जीतती रहो.