मेरे बेटे


मेरे बेटे
तुमने हार नहीं देखी अभी
तभी तुम घबराते हो
अक्सर परेशान होते हो
और ख़ुद में सिमट जाते हो

हार कठोर है, निर्दयी भी
निराश करती है, हताश भी
लेकिन यह सोचो बेटे
की ज़िंदगी कहाँ आसान है
गिरकर उठे वही तो इंसान है

बरसों बाद जब देखोगे तुम
मुड़कर पीछे जीवन की डगर को
हार की निराशायें और जीत की खुशियाँ
अधिक मधुर लगेगी तब तुम्हे हार ही
बात यह याद रखना मेरी

हार सिखाती है अगली बार जीतने का जज्बा
आशाओं की बारिश में भीगने का मज़ा
'मैं कर सकता हूँ' - यह एहसास
जीतूँगा मैं यह विश्वास

क्यूंकि कोशिश अधिक बड़ी है जीत से
और जीतेगा वही जो कोशिश करता है दिल से
तुम सोचो चाहे कुछ भी मैं जानता हूँ बेटे
तुम जीतोगे, तुममें है वो बात
ऐसा है मुझे विश्वास, कहता हूँ मैं पूरे दिल से

No comments: