हाल बेहाल

हाल बेहाल 
जेब खस्ता 
रोटी मेंहगी 
आदमी सस्ता 

रोता आसमान 
सोती धरती 
खून मांगे रोज़ 
यह कैसी धरती 

हवा भारी 
वादे हलके
सच्चे झूठ
आँसू ढलके 

मरता बचपन 
छोटी राहें 
सूना रास्ता 
तकती निगाहें  

इंसान क्या था  
क्या बन गया??  

ज़िन्दगी क्या थी  
क्या हो गयी??  

मुस्कान हँसती थी कभी  
आज न जाने क्यूँ रो पड़ी 
कहाँ खो गयी ??

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