मंजिलें अभी हज़ार बाकी

पाया क्या राही तूने अब तलक
रास्ते तन्हा, न हैं साथी
चलते चल यारा
मंजिलें अभी हज़ार बाकी

ज़िंदा सफर को अपने रख
कोख से जो शुरू हुआ
राख तलक जिसकी सवारी
मरने न दे मनसूबे अपने
ऐसी शमा जला वो प्यारी

आँखों में वो सपना लिख
नज़र आए जो हरदम
नींद उड़ाए, सोते जगाये
आसमान की ओर दूर कहीं
फुर्र से उड़ा ले जाए

फितरत भूल मत खुदा की
साथ है सबके मगर
पहला कदम तेरा, आखिरी कदम तेरा
तू रुका, वो रुका
तू झुका, वो झुका

इन मोडों से गुज़रे कई
पर वक्त ने सबके निशां मिटा दिए
याद उन्हे ही रखती दुनिया
जिन्होंने ने तूफानों में भी
अपने किनारे पा लिए

और जीत जाए जब तू
तो गीत खुशी का ज़रूर गाना
मुस्कान बाँटना
किसी का दुःख घटाना
चलती है जो वो है ज़िन्दगी
थमती नही कभी,
सुस्ताती
है ज़रा सा हालाँकि
चलते चल यारा
मंजिलें अभी हज़ार बाकी !

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