Katra Katra

Main jag sara pi gaya
ek hi ghoont mein
aur jab jaaga to dekha
jag pi raha hai mujhe katra katra !!

मेरा बिछड़ा यार !

मुददतें बीती
वैसा सावन फिर न आया 
वैसी बारिश
वैसा भीगता प्यार, फिर न आया !  

मुददतें बीती 
वैसे गीत फिर न गाये  
वैसा संगीत 
वैसे राग मल्हार फिर न आये  

मुददतें बीती 
वैसी होली, वैसी दीवाली फिर न आई 
वैसे त्यौहार 
वैसी बहार, फिर न आयी  

मुददतें बीती
वैसा रूठना और वैसा मनाना फिर न आया 
मेरे हर एक आँसू पे जान लुटाने वाला 
मेरी ख़ुशी को अपनी इबादत बनाने वाला 
हर दम साथ निभाने वाला 
मेरा बिछड़ा यार फिर न आया !