मेरा बिछड़ा यार !

मुददतें बीती
वैसा सावन फिर न आया 
वैसी बारिश
वैसा भीगता प्यार, फिर न आया !  

मुददतें बीती 
वैसे गीत फिर न गाये  
वैसा संगीत 
वैसे राग मल्हार फिर न आये  

मुददतें बीती 
वैसी होली, वैसी दीवाली फिर न आई 
वैसे त्यौहार 
वैसी बहार, फिर न आयी  

मुददतें बीती
वैसा रूठना और वैसा मनाना फिर न आया 
मेरे हर एक आँसू पे जान लुटाने वाला 
मेरी ख़ुशी को अपनी इबादत बनाने वाला 
हर दम साथ निभाने वाला 
मेरा बिछड़ा यार फिर न आया !

4 comments:

shalu said...

awsome.. :)

Aditya Patel said...

thank you.

shekhu said...

is kavita ka hardcopy mare paas hai jo is poet ne galti se mare notebook me likha tha datasimulation ke lecture me

Aditya said...

arrey shekhar galti se nhi.. bina galti ke likhi thi tumhari copy mein ye kavita :)