रूठा हूँ मैं ?


इधर भागे कभी उधर भागे
ये हवा न जाने किधर भागे
गीली है
भीनी भीनी भी
महकी सी
झीनी झीनी भी
यादें लाये, यादें ले जाए
ये हवा न जाने क्या क्या दे जाए
चली होगी क्या ये तुम्हारे पास से
साथ नहीं तुम क्या तुमने भी छुआ होगा इसे हाथ से
कई रात से
एक बात से
और मुलाकात से
चूका हूँ मैं
इस हवा को कैसे पता की तुमसे रूठा हूँ मैं ?

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