आदमी भी अजीब है

Sometimes its better to be honest and speak the truth,
Sometime its not.

आदमी भी अजीब है
कितने राज़ छुपाये फिरता है
कुछ दूसरों से, कुछ खुद से
कुछ जाने, कुछ अनजाने
बातें घिनौनी और पुरानी
सच्ची कहानियाँ हरकतें शैतानी
कभी खुल जाए जब कोई ऐसा राज़
तो परदा उठ जाता है
आदमी भी अजीब है
झूठ ओढे जीता है
झूठ ओढे मर जाता है

4 comments:

AcHiNtYa ShArMa said...

wow yaar...
....

tru very tru...!

pavit.juit said...

I HAVE AN HONEST CONFESSION SINCE A LONG TIME NOW I HAVE BEEN FIGHTING IT THAT ...

Y

क्यूँ आदमी झूठ के आडे जीता है
और क्यूँ जुट के आडे मरता है....

न जाने वोह इस जिंदिगी से क्या चाहता है
न जाने उसकी इससे क्या हसरते हैं ...
पर मन को मानने मैं, उन्हें पाने में
क्यूँ आदमी झूठ के आडे जीता है
और क्यूँ जुट के आडे मरता है....

यह राज़ बड़ा गहरा है कि मैं आज भी कवी हूँ
न जाने कब तक मैं आपने आप से
और न जाने कब तक अपनी ज़िन्दगी के इस पहलु से
क्यूँ आदमी झूठ के आडे जीता है
और क्यूँ जुट के आडे मरता है....

लहरें, ज़िन्दगी, तूफ़ान, हलचल, कोलाहल
वाडे, कसमें, प्यार, वफ़ा
और न जाने सच, हकीकत, भूत, भविष्य
क्यूँ आदमी झूठ के आडे जीता है
और क्यूँ जुट के आडे मरता है....

Aditya said...

hmmm.. nice one pavit.

and thnx achintya..true indeed.

Rishi said...

nice one aditya...combining feeling and facts of life in words... a miracle, which u r playing good...