यूँ गाते चल दिए




दिल में दर्द दबाये चल दिए
हम आँखों में आंसू छुपाये चल दिए


भीड़ है, शोर है और है तन्हाई
हम गम में भी मुस्कुराये चल दिए


टूटे न थे हम ऐसे कभी
आज अरमानो के टुकड़े उठाये चल दिए


उड़ते थे आसमान में कहीं
आज ज़मीन में सर गड़ाए चल दिए


आदत-ए-सुकून हो गयी थी
आज यूँ ही घबराए चल दिए


रब तेरा लिखा होता है सब यहाँ
खुद को समझाए दुनिया को बिनबताये
खुदाया तेरी ओर हम
यूँ गाते चल दिए |

2 comments:

Raphael said...

bas, isliye hum tumhara blog padhte hain, you just blew me away with that little piece, bas bawa aise aur likhte raho...

Aditya ! said...

wasn't expecting any comment on this post.. becoz koi publicity ni mari thi iski :D

thnx a lot sir :)))