रब्बा तेरा हुलिया पता है मुझे!

मेरे मामा की एक साल की बेटी है आँचल. उस नन्ही सी परी को घर में खेलते देख मेरे अन्दर के कवि महाराज फड़फड़ा उठते हैं और कुछ ऐसा लिखते हैं,

या रब्ब
तुझे देखा न था अब तक
पर अब तेरा हुलिया पता है मुझे
गोल गोल क्यूट से गाल हैं तेरे
खूब मस्तियाँ करता है
हंसते हंसते रोता है
और रोते रोते हंसता है

मम्मा और मम मम ही बस बोलता है
खुशी में किलकारी मारता है कभी
और कभी बस एक टक देखता है
जानता हूँ सीख रहा है तू बहुत कुछ
दौड़ते दौड़ते धम्म से गिर जाता है
कैसा सा है,फिर भी खुश होता है तू

जब बहुत शरारत करता है तब तेरी पिटाई भी होती है
अम्मा है न वो जो तेरी, तुझसे बडा खीज जाती है तब
लेकिन जब तू आँखें बंद कर सो जाता है उसकी गोदी में
अपने छोटे छोटे हाथों से उसकी ऊँगली थामे
तब वो तुझे ऐसे देखती है
जैसे कि देखते ही रहेगी
लेकिन फिर तेरे कम्फर्ट का ख्याल करके
तुझे आराम से बिस्तर पे सुला देती है
ठण्ड न लगे इसलिए चादर उढ़ा कर
मच्छरदानी लगा देती है

रब्बा तू भी बडा अजीब है
कि तेरा भी कोई रकीब है
कहता है उसे तू मम्मा
मम्मा मम्मा मम्मा
जानता हूँ मैं तुझे अब
तेरा हुलिया पता है मुझे!

9 comments:

Ankur said...

I'm left with no words for appreciation, you are awesome!

Misha said...

:)

swati said...

brought a smile on my face.. soo simple yet so sweet... :)

Raphael said...

and this is my case in point, this is what i see and what you have, absolutely mind blowing.

Dheer said...

great and lovely work...

priyanka said...

I m speechless...
stupendous work :))

Gaurav Kant Goel said...

Beautiful words!! Keep them coming....

*NaVdEeP* said...

Nice Work Man, Keep Doing This Sort Of Work

Aanchal said...

Aanchal's r always so cute.. see :) On a serious note, very cute post! :)