25 must watch bollywood movies

Following list was compiled  by me when a friend of mine asked for selected (non-cheesy types) good hindi movies of last 10 years. I have selected these movies based on my personal choice and given them rankings accordingly.


#25. Life in a METRO

#24.Omkara

#23. Sarkaar Raaj

#22. Hum Tum

#21. Baghbaan

#20. Legend of Bhagat Singh

#19. Raincoat

#18. Maqbool

#17. Page 3

#16. Dor

#15. Ab Tak Chhappan

#14. Gangajal

#13. Dil Chahta Hai

#12. Taare Zamin Par

#11. Munnabhai Series

#10. Lakshya

#9.  A Wednesday

#8.  Black

#7.  Dev D

#6. Guru

#5. Chak De India

#4. 3 Idiots

#3. Iqbal

#2. Swades

#1. Rang De Basanti

Random Bakvaas

I'm bored of repeating myself.
Need a change. Have few good ideas in 'mah' mind.
Too lazy to do anything right now.

Peace.

note: Random Musings is now Random Bakvaas !

Solution to LIFE ?

Wrote this one a long time ago. Found it today rotting in one of my lesser visited folders.


There's a crying child
behind this smiling man
who is in tears for very long

Masking his feelings
from this blind world
for nobody cares actually

Life is a profit-loss statement
hanging between good and bad
here you're liable for your assets

Expectations are such a bitchy thing
they leave you nowhere but to regret
yet we keep on expecting

In this vicious circle of pain and sorrow
we find temporary happiness
and then go on with our miseries

Is there a solution to life?
Death perhaps?
I guess.. not!
Then?
Who knows?


पिटारा पोएम्स का

These tiny pieces were written on the night before my exams. I don't know what is it that fuels the 'vellaness' in me then. Strange but true :)


लागे न मन कहीं मोरा
ऐसा चला है जादू तोरा
पिया बावरे


आधी रात है, आँगन है अँधियारा
सपने भी सो गए हैं बावरे
आना हो तो आ जाना
नहीं तो..
इंतज़ार करते उम्र बीती
हम अब सोये तो फिर न उठेंगे
पिया बावरे



(Experimental Stuff. Hinglish Poetry:)

मैंने लोगों को waste होते देखा है
बुराइयों को cut, copy, paste होते देखा है
देखा है रातों को जागते, दिनों को सोते
मैंने धूल-ए-ज़मीं को Everest होते देखा है




सताती है
रुलाती है
हँसाती है
उकसाती है
तड़पाती है
जितना समझो उतना उलझाती है
ज़िन्दगी बड़ी कमीनी है
लेकिन वक़्त के साथ सब सिखा जाती है




ज़िन्दगी का मकसद
गर पता चले तो बताना ज़रूर
कोई मस्त सा शेर तब सुनाना ज़रूर
हम वाह वाह करेंगे :)




रिश्तों को न कुचलो यूँ
टूटे गर फिर न जुड़ेंगे
चादर में थेगड़े लाख लगा लो
धागे फिर भी निकलेंगे




आदमी

किसको धोखा देता है आदमी ?

यहाँ न सच कुछ, न झूठ कुछ

नज़र नज़र का खेल है

फिर भी उलझता है बेवजह

शायद खुद को ही धोखा देता है आदमी !



किस लिए जीता है आदमी ?

यहाँ न रोना सच, न हँसना सच

मुक़द्दर का खेल है बस

फिर भी फिसलता है बेवजह

शायद मरने के लिए ही जीता है आदमी !



और क्यूँ है, क्या है ये आदमी ?

जैसे आया था वैसे ही चला जायेगा

ज़िन्दगी तो एक खेल है

हार-जीत ढूँढता है बेवजह

शायद वक़्त के समुन्दर की एक मामूली बूँद है आदमी !

मौला बता दे ज़रा


हमसे ऐ मालिक हुई क्या खता
तू बता दे ज़रा
तू बता दे ज़रा

भूल करते हैं सब
उसमें क्या बात है
माफ़ करना तो बस
तेरे हाथ है
जो पथ से भटके होते हम
तो क्या ऐसे होते हम
दिल साफ़ था, और साफ़ है
तू साथ था, क्या अब पास है?

हमसे ऐ मालिक हुई क्या खता
तू बता दे ज़रा
तू बता दे ज़रा

तेरे नाम से जीते थे
तेरे नाम से जीते हैं
कैसे बताएं कितने मुश्किल हैं
ये पल जो ऐसे बीते हैं
जीवन पथ पर ऐसे मौला
परख रहा है क्यूँ?
लिखा होगा शायद ऐसा
समझाते हैं यूँ

ऐ मेरे मौला
तुझसे आये थे, तुझमें ही मिल जाएँ
रहम करना बस इतना.. कि पापों से तर जाएँ

हमसे ऐ मालिक हुई क्या खता
तू बता दे ज़रा
तू बता दे ज़रा

Oh, Heavens!!

I prophesied in my last semester that the HEAVEN @ JUIT  (the hills, clouds and the great scenic views) will never come back again in my college life. Luckily, it CAME BACK :) Along with a mystic smile!