कितने आँसू..

कितने आँसू छुपा रखे हैं
नैनों ने अपने दामन में
सौंधी खुशबू देते ये
बरखा बन सावन में

कितने आँसू..छुपा रखे हैं
नैनों ने अपने दामन में

एक आँसू ग़म का
जो छलकता है जब
दर्द हल्का कर जाता है

एक आँसू टीस का
उस अधूरी कहानी को बयां करता
हौले से ढलकता चला जाता है

फिर होता है एक आँसू तन्हाई का
जो दूर बैठे किसी अपने से
अक्सर मिलवा जाता है

एक आँसू यादों भरा
जो जब छलकता है
हसीं पलों को फिर जिंदा कर जाता है

होता है एक आँसू ऐसा भी फिर
जैसे किसी बच्चे का
बिना बात.. बस आ जाता है

एक आँसू प्यार का
सबसे पाक, और बेबाक
जाने क्या क्या कह जाता है

और आखिर में एक आँसू ख़ुशी का
जिसे सहेजने को जी करता है
क्युंकी यही आंसू है जो किसी ख़ास लम्हे को
यादगार बना जाता है

और कितने आँसू छुपा रखे हैं
नैनो ने अपने दामन में
सौंधी खुशबू देते जो
बरखा बन सावन में

कितने आँसू छुपा रखे हैं
नैनों ने अपने दामन में..

4 comments:

Raphael said...

very cute, almost like a sad lullaby, very nice yaar....it put a smile on my face

Aditya ! said...

thanks a lot sir.. :)

Misha said...

ek aur aansu ki daastan :

"jab bhi chale gaye vo...chhod kar sath mera....
ek aansu aa gaya palko par...sath dene mera....."

Aditya ! said...

baah .. kya baat haai :)