कक्कू

कक्कू. सारा गाँव उन्हें कक्कू ही कहता है. मेरे छोटे नाना को ये नाम मेरी माँ, मामा और मौसियों की वजह से मिला. उनके चाचा होने के नाते पहले वे काका कहलाये और फिर ऐसे ही – ‘कक्कू’. बचपन में, मुझे तो याद नहीं, माँ बताती हैं, मैं और असीस(आशीष-मेरी मौसी का बेटा ) उनके पास ही सोया करते थे. कक्कू हम दोनों को अपने कन्धों पर बिठा लेते और खूब घुमाया करते. असीस थोडा ज़्यादा लाड़ला था. और मैं तब इतना छोटा था की जलना नही जानता था. मेरी छोटी नानी याने की काकी ये बताती हैं की कक्कू सारे घर को बैलगाड़ी(तांगा) में बिठा कर मेला लेके जाते थे. चाहे सुबह सुबह प्रभात फेरी में जाना हो, या गाँव में किसी भक्तों(देवी गीतों) का कार्यक्रम हो, कक्कू हमेशा सबसे आगे रहते हैं. भैंसों को नहलाते हुए, उनका दाना पानी करते या फिर दूध निकालते हुए कक्कू को फुर्सत ही कहाँ मिल पाती है.

कितने बरस बीत गए मैंने उन्हें बिना काम के बैठे नही देखा. कभी यूँ ही गाँव पहुँच जाओ तो काकी मिलती हैं बस घर पर और कक्कू, कक्कू या तो खेत में होते हैं या फिर घर का ही कुछ काम कर रहे होते हैं. माँ और उनके भाई बहिन, मैं और मेरे भाई बहिन और अब मुझसे अगली पीढ़ी, तीन पीढ़ियों के बच्चो के फेवरेट बस कक्कू ही रहे हैं. न जाने क्यूँ. उनमें शायद एक ऐसी मासूमियत है, ऐसी सादगी, ऐसा प्रेम भाव की बच्चे बस उनसे झट से दोस्ती कर लेते हैं.

8 comments:

raaaj said...

inke baare be ek khas baat ki inse "bhai bhai k rishte ko kaise nibhaya jata he hum sabhi sikh sakte he"

Aditya ! said...

sahi kaha bhaiya aapne :)

shekhu said...

सादगी के साथ गाऊं का प्यार जो छलकाने की कौशिश की है छलक गए यार..
dada ,dadi aur nana ,nani ke payar ko mera salaam..

Aditya ! said...

thanku shekhu..

Aditya ! said...

bahut pehle likha tha... blog par ab daala hai...

swati said...

dil chhoo liya :)

Aditya ! said...

@swati, is article ko tumse behtar aur koi ni samajh sakta tha.. :)

*NaVdEeP* said...

Nyc yaar....... M happy that i gonna meet "कक्कू"