पिटारा पोएम्स का - 2














A collection of random poems i keep scribbling here and there.. just like that :)


चख लो चाँद को
आसमान की प्लेट में पड़ा ये
खी खी कर मुस्काता है
तुम्हे सनम नज़र आये तो आये
भूखी आँखों को ये रोटी ही नज़र आता है



sometimes i wish,
to go back and mend some things

sometimes i wish,
to just go back and relive


sometimes i wish,
to fast forward the present

sometimes i wish,
to just pause the present

sometimes i wish,
people around me to change

sometimes i wish,
myself to change


sometimes i wish,
to run as fast as i can

sometimes i wish,
to just sit back and relax


sometimes i wish,
that all my wishes come true

sometimes i marvel,
why do i have so many wishes?

sometimes i wish this
sometimes that
i know i shouldn't
but i do!



चौराहे पर खड़ी ज़िन्दगी,
बीच रास्ते पड़ी ज़िन्दगी,
बच्चों सी है शायद
आज अपनी जिद पर अड़ी ज़िन्दगी



ख्वाब टूटे फूटे
बचपन से सजाये थे जो
आज कमरे में ऊपर के छज्जे पर रख दिए
धूल खाते रहेंगे अब ये
कोई कबाड़ी वाला आएगा अगर
तो मम्मी शायद बेच दें
ख्वाब ये टूटे फूटे



कितनी common बात है, आज फिर रात है..
आज फिर सोया है सूरज, फिर तारों की बरात है..
फिर हंसा है काल, फिर रोया आकाश है
आज फिर रात है.. कितनी common बात है...



P.S. "पिटारा पोएम्स का - 1" can be read from here :)

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