इतने आंसू कहाँ से लाऊं


जागी सुबह, सोये सपने
आँख खुली तो, खोये अपने
इतने सपने कहाँ से लाऊं
कि जी भर कर सो पाऊं

लम्बी उम्र, मुश्किल डगर
साथी दो, साया और सफ़र
इतनी सांसें कहाँ से लाऊं
कि मरके भी जिंदा रह जाऊं

गुज़रता वक़्त, तकती आँखें
याद आयीं हैं आज वो बातें
इतनी यादें कहाँ से लाऊं
कि वापिस वो दिन जी पाऊं

बारिश की बूँदें ढम-ढम ढलके 
आंसू कई छप-छप छलके
इतने आंसू कहाँ से लाऊं
कि जी भर कर रो पाऊं

इतने आंसू.. कहाँ से लाऊं
कि रोते रोते तर जाऊं
इतने आंसू.. कहाँ से लाऊं
कि रोते रोते मर जाऊं

4 comments:

Anonymous said...

Itni bakwass kavita k liye shabd kaha se lau.... I kno u got it ;)

Aditya ! said...

no i didnt..

kalpana said...

short of words......tareef kar saku itne shabd kaha se lau :)

Aadii said...

Thank youu :)