ये जो रात है


ये रात न गुज़रेगी
इतनी आसानी से
अभी तो चाँद पूरा पका भी नहीं
अभी कच्ची सांसें लेता कोई 
तारा टूटा भी नहीं
सोये नहीं कुछ लोग अभी
बस्ती शांत है,
शांत हैं रास्ते,
लेकिन अभी तो सिर्फ शुरुआत है
रात अभी जवान हो रही है
ढलेगी नहीं इतनी आसानी से


अभी तो कई सपने देखने हैं
रंग बिरंगे.. सपनो में सपने..
हसीं खुशनुमा मुस्कुराते सपने
रात की सवारी करेंगे आज ये
अभी नहीं ख़त्म हुआ तमाशा
अभी तो शुरुआत है
अभी बहुत बाकी है मेरे दोस्त
ये तन्हाई की रात है..
ज़िन्दगी को तारे के साथ तोड़कर खा जाएगी
ये जो बेहद लम्बी रात है
गुज़रेगी नहीं इतनी आसानी से
अंत की अभी शुरुआत है
ये जो रात है ..

वक़्त अक्सर रुक जाता है तुम्हारे बिना ..
तुम्हारे बिना रुक गयी ये रात है ..

1 comment:

shekhu said...

kya kahne in adao ka koi jajbaat chupe hai in adaon me
excellent poem:)