रिश्ते

समंदर किनारे उस रोज़
रेत के टीले बना उगाये थे रिश्ते
बह गए तो बह जाने दो

टूट कर कब तक बिखरते रहोगे
बहुत हो चुका ये सिलसिला
इसे थमना है, थम जाने दो

1 comment:

Keyur B Shrimali said...

Bohot Ho Chuka yeh Silsila, Isse Thamna Hai Tham Jaane Do... very true !