बूँद बूँद



बूँद बूँद
रात भर

अलसाए से
सताए से
दर्द समेटे
यादें लपेटे
बातें कहते
क्या कुछ सहते
चुभन सी एक
घुटन सी एक
पलती रही
बढती रही

बूँद बूँद
रात भर

कहानी गढ़ी
दिलचस्प बड़ी
आवारा हुए
नाकारा हुए
ताने सुने
आहें भरीं
लम्हों की लड़ी
और वो घडी
कतरा कतरा
थामे न थमी

बूँद बूँद
रात भर
मचलते रहे बरसते रहे
कुछ आंसू आँखों में ही जलते रहे

1 comment:

Dushyant said...

Tez baarish k baad bhi sunehri dhoop aati hai Adii. Zindagi mein in boondo k baad bhi khushiyo ki dhoop zaroor aaegi :)