आज रात नींद कहाँ


आज रात नींद कहाँ

कई ख्याल हैं ज़हन में
अच्छे
बुरे
झगडे हैं
कुछ बातें जो कह दीं, नहीं कहनी थीं
कुछ बातें जो नहीं कहीं, कहनी थीं
कश्मकश है
खुमारी है
गणित है
हिसाब किताब हैं
आज रात नींद कहाँ

कुछ चीज़ें जो हुईं, नहीं होनी थी
कुछ चीज़ें जो नहीं हुईं, होनी थीं
आग है
आंसू हैं
सरफरोशी है
गर्मजोशी है
गुस्सा है
डर है
दर्द है
उम्मीदें हैं
हौसला है
जज्बा है
बस चैन नहीं
कई ख़याल हैं ज़हन में

आज रात नींद कहाँ

4 comments:

kalpana said...

bahut khoob likha hai...........

Aadii said...

shukriya..... =)

Kopal said...

best ever read !

Aadii said...

@Kopal, Thank you :)