यहाँ


काश तुम यहाँ होते
तो मेरी आँखें शायद सुन पाते, समझ पाते

लफ़्ज़ों का मोहताज़ जो हो गया हूँ
वो मैं न होता तब
मेरी आवाज़ से बेखबर जो हो गए हो
वो तुम न होते तब
खामोश बैठ बातें कर पाते हम
खामोश.. सी बेचैनियाँ मेरी शायद सुन पाते तुम
थकती साँसों को सांस आ जाती
पथराई आँखों को नींद
मुझे मैं मिल जाता
तुम्हे तुम

काश तुम यहाँ होते
काश.. मैं यहाँ होता