दर्द



दर्द घुला है हवा में
छुपा हैं कहीं, यहीं
आँखों की नमीं के पीछे से
आँसू बन बहता नहीं
बेज़ुबान कुछ कहता नहीं

हंसो कभी तो दिखाई देता है
एक चेहरा अक्सर सुनाई देता है
खुरदुरे गर्म हाथों का एहसास
पैनी चीरती नज़र का एहसास
एक आवाज़ जो अटक गयी है हलक में
और साँस.. जो फैल गयी है फलक में
नर्म उजले सवेरों की तलाश है
अब तो बस खाली.. खाली आकाश है
शायद ये ही दर्द का एहसास है
दर्द.. घुला है हवा में
छुपा है कहीं, यहीं

राहें जो सीधी दिखाई पड़ती थीं
ज़िंदगी को साथ ले एकदम से मुड़ गयीं
कुछ तकदीरों का साथ छूटा
कुछ यूँ ही जुड़ गयीं
यादें साथ हैं बस
बातें रुकी नहीं, बहती गयीं
टूटे तारों के सामने आँचल फैलाए
आँखें अब सुर्ख लाल हुईं
कुछ महसूस नहीं होता अब
कम्बख्त घुला है हवा में
छुपा है कहीं, यहीं

दम निकले तो जान आए.

2 comments:

Swati said...

i hadn't read this one before.. very true.. :')

Aadii said...

you did read this one before on fb :)
see your comment there :)