अनजान हैं वो


मेरी नादानियाँ भी तेरी
मेरी शैतानियाँ भी तेरी

मेरी मासूमियत भी तेरी
मेरी चालाकियां भी तेरी

मेरी हैवानियत भी तेरी
मेरी इंसानियत भी तेरी

मेरी बातें भी तेरी
मेरी सोच भी तेरी

मेरी राहें भी तेरी
मेरा सफ़र भी तेरा

मैं टुकड़ा हूँ तेरा
टूट कर गिरा था कभी
तुझमें मिलना मुक़द्दर मेरा
मैं नदी, तू समंदर मेरा

नादानियाँ
शैतानियाँ
इंसानियत
हैवानियत
बातें
सोच
राहें
और सफ़र

अनजान हैं वो
जिन्हे लगता है ये उनका है
अनजान हैं वो
उम्मीद है, सोने से पहले इक बार जाग पायें वो!

4 comments:

Swati said...

:)))))) nice one ...

Aadii said...

:))

Kopal said...

superbbb as always...
i guess m addicted to ur blog now :)

Aadii said...

:)
Thank you..