नीले रंग के परे



सूखे पत्ते हवाओं से एक दिन आख़िर
तंग आ गये और बोले
क्यों तुम इतना इतराती हो 
हमें यहाँ से वहाँ बेवजह ही उड़ाती हो

हवा हंसी और बोली
बेवजह नहीं पगलों ज़रा ध्यान दो
पेड़ ने ही कहा था 
 ये बच्चे हैं मेरे इन्हे उड़ान दो

पत्ते खीझे और कहने लगे
हमने तो नहीं माँगा ये
क्यूँ पेड़ अपने सपने हम पे लाद रहा है
बूढ़ा कम्बख़त अपनी उड़ान हम पे टाल रहा है

पेड़ चुपचाप सुन रहा था सब 
आख़िर बोला कि तुम मेरे अपने ही तो हो
मेरे बच्चों ज़रा देखो तो सही
इसमें तुम्हारा ही भला है

हवा ने सरसराकर हामी भारी और बोली
मैंने दुनिया देखी है, बहुत खूबसूरत है
तुम खुश किस्मत हो प्यारे पत्तों
तुम्हे भी ये जहां देखने की ज़रूरत है

पेड़ ने हार ना मानी और समझाते हुए कहा
कई रंग, कई खुशबुयें और भी हैं
मेरे बच्चों ये ज़िंदगी छोटी सी है लेकिन
इस नीले रंग के परे और आसमां भी हैं

पत्तों को लेकिन बात समझ में नहीं आई
चिढ़ गये और बोले
हमें किसी और के सपने नहीं जीना
तुम खुद ही क्यूँ नहीं देखते सारे जहां

पेड़ की आँखों में उस शाम नमीं थी
हवा भी गुस्से में कुछ तेज़ बही थी
सुबह जब हुई 
तो पेड़ ज़मीन में गिरा मिला
मानो मिट्टी से गले लग के रो रहा हो 
पत्तों को दुनिया दिखाने की चाह में
शायद रात उसने खुद उड़ने की कोशिश की थी.. 

7 comments:

Kopal said...

AMAZINGG !!!
Just AMAZING !!! m speechless...
I dunno even when it has a sad end.. the feel behind it is super +ve...

Keep the good work On !! KUDOS!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

Aadii said...

Thank you so much. Appreciate it :)

Punkster said...

Respects sir.
Very beautifully woven.
You're awesome.

Aadii said...

I'm glad. Thanks a ton :)

virendra said...

Great Aadii, so beautiful so touching:)

Aadii said...

Thanku Viru bhaiya :)

:) said...

Beautiful :)