पहली बारिश

कुछ पुरानी खुशबुयें बिछ गयी हैं गली में
बावरी बदली मचल रही है हड़बड़ी में
धूप लुका छुपी खेलती हंस के इतरा रही है
खामखा गेंदा गुलाबों की पंखुड़ियां उड़ा रही है
बरामदे में धूल जमा हुई तो माँ झाड़ू ले आई 
लेकिन उसे भी सता रही है ये पगली पुरवाई
सौंधी सौंधी महकी है कल रात 
सौंधा सौंधा हो रहा है दिन 
आज बेवजह हंसी की गुज़ारिश हुई है 
आज पहली बारिश हुई है ..

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