फुर्सत के काम



आँख बंद कर बैठना कभी
और झाँकना अंधेरे में
रंग बिरंगी लकीरों के बीच इठलाती
रौशनी दिखाई देगी

पानी को चख़ कर देखना कभी
तसल्ली से घूँट घूँट पीना
महसूस करना एक नन्ही नदी भीतर
ठंडक सी खिलखिलाई होगी

कभी उंगलियों से दोनो कान बंद करना
टटोलना तूफान लहू का
चीखते सन्नाटे में एक मासूम
धड़कन सुनाई देगी

भीनी मिट्टी की सौंधी खुश्बू को कभी
साँस बनाकर एक होना
बाहर छोड़ देना वक़्त को
ज़िंदगी परछाई होगी

और कभी किसी बच्चे की अधखुली मुट्ठी में
हौले से अपनी उंगली थमाना
रूह को गर्माहट और देखना चेहरे पर 
मुस्कुराहट एक नयी खिल आई होगी

1 comment:

Anonymous said...

#QATALest ..

SKB