दर्द अजीब है



दर्द अजीब है
अजीब खेल खेलता है
धड़कन की रफ़्तार से उलझता है
कभी साँसों को दौड़ा देता है
आँखों में आग लगाता है
और कभी खून जमा देता है
दर्द अजीब है
भुलवा देता है कितनी बातें
कभी कितनी बातें समझा देता है
विश्वास खुदा पर कोई गर ना करे
दर्द वो भी सीखा देता है
एक एक आहट सुनाई देगी
कभी यूँ ही परछाई दिखाई देगी
सह सको तो सह लेना
कह सको तो कह देना
ज़मीन से आसमान में ले जाता है
और उड़ते हुए को ज़मीन पर लाता है
कभी मौत से रूबरू कराता है
कभी ज़िंदगी से मिला देता है
दर्द भी अजीब है
कमबख्त आदत बन जाता है .. 

3 comments:

1CupChai said...

सच्चाई लिखी है भाई| बोहोत खूब :)

Raphael said...

amazing...really really amazing...
there was a visual delight regarding this...

Aadii said...

Thanku :)