यहाँ ~


इन कायदों में इन पेचीदा क़ानूनो में
इन काँच के मखमली मकानो में

इन समाजों के दिखावटी रिवाज़ों में
इन धूल खाते बंद दरवाज़ों में

इन दस्तूरों की गिनती है हज़ारों में
इन होशियार लोगों की शातिर निगाहों में

एक पंछी आसमान को तकता है
यहाँ उसका दम घुटता है ~

इन बेतरतीब चमकती इमारतों में
इन बेहोश नशीली हरारतों में

इन मतलबी ज़रीन धागों में
इन हंसते नज़र आते अभागों में

इन सलीके से सजे मेहमानो में
इन ज़हरीले लज़्ज़तदार पकवानो में

एक पंछी उड़ने के सपने बुनता है
यहाँ उसका दम घुटता है ~

इन बेमतलब से आम सवालों में
इन सहमे से मासूम ख्यालों में

इन धड़कनों की बेतरतीब रफ़्तारों में
इन रूह में जलते गुबारों में

इन खिलखिलाते शैतानी सायों में
इन अपने से लगते परायों में

एक पंछी बारहा टूटकर जुड़ता है
यहाँ उसका दम घुटता है ~


4 comments:

DHEER said...

dhoop k makan sa :)

रश्मि प्रभा... said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति

Aadii said...

Thank you :)

Anubha said...

WOW!