बस यूँ ही


These are the 1 liner shayaris / couplets / poems / observations that I keep posting on Twitter.

तुम क्या पढोगे किताबें और क्या सीखोगे तजुर्बे से / गिरकर संभलना किसी बच्चे से सीखो ~ 

हंसो जो दर्द में तो एहसास होता है / मुस्कुराना कितनी बड़ी बात होता है ~ 

दिन बेचकर रातें खरीदी हैं / ये भी अपनी ना हुई तो फिर कौन है अपना? ~

सूरज संग उगते लोग सूरज संग डूबते लोग / रातों को उठ उठ कर घर में घर ढूंढते लोग ~ 

बारिश की बूँदें हैं या लड़ी आसुओं की / खुदा इंसान की हालत देख मुस्कुराता तो नहीं होगा ~ 

मिलेगा दुनिया में सब कुछ गर चाहो इतनी शिद्दत से / किसी मासूम बच्चे के हाथ chocolate की ओर बढ़ते हैं जैसे ~ 

बरसों बाद आज दिखी वो तो होठों पर हंसी आ गयी कुछ इस तरह / किताब में सूखा पड़ा गुलाब खिल उठा हो दोबारा जिस तरह ~

सोच समझ कर लफ्ज़ रखना किसी की हथेली पर / छालों के कुछ निशां जाते नहीं हैं ~ 

रिक्शे वाले को लड़ लड़कर बीस रूपये दिए / और फिर मॉल में जमकर शॉपिंग की ~

थोड़े सफ़ेद अँधेरे, चार मुरझाये फूल, चंद अधपके ख्वाब / टटोला खुद को तो बस ये मिला / रूह के निशाँ जाने क्यूँ मिलते नहीं? ~

उँगलियों पर गिन लेते हैं खुशियों को हम / हमसे तो अनपढ़ अच्छे ~ 

आँखों में ईमानदारी, साँसों में सच, रूह में गुलाबी खुशबुयें / बहुत खूबसूरत है चेहरा तुम्हारा ~ 

चाँद को मरोड़कर रख लिया उसने जेब में / ससुरा defective boomerang निकला ~ 

नर्म गद्दे पर AC की ठंडक में पड़े पड़े अक्सर सोचता हूँ / कि नींद छोड़ आया हूँ उसी कच्चे आँगन में पड़ी टूटी चारपाई पर ~

इस शहर का ये अजब उसूल है / जो ना हो सका अपनों का वो सबको कबूल है ~

नन्हे बच्चे से पूछा उसकी दोस्त मछली ने / घर के बाहर बड़ा अच्छा लगता होगा ना शाम को? ~

इन उथली आँखों में जाने कितने गहरे राज़ छुपे हैं / साथ बर्बाद किये वक़्त में यादों के शहर कई आबाद छुपे हैं ~


3 comments:

Keyur said...

boss, if this is something u created, you have my Respect !

Aadii said...

Thank you sir.

Shivang said...

Amazing one liners bro