नज़र के उस पार ~


देखो नज़र के उस पार
कुछ घर बसे हैं सहमे से
चिमनियों में से उठता धुंआ
गवाह है कि रिश्तों की गर्माहट अब भी बाकी है
वक़्त की आंच पर पकने रखे हैं कुछ वादे
देखो नज़र के उस पार
एक पगडंडी है घरों से लगी हुई
जो दूर शहर को जाती है
आती भी है क्या ये पता नहीं?
मटमैले घरों की खिड़कियाँ मगर एकदम साफ़ हैं
यहाँ से नज़रें दिन में पगडंडी से इश्क लड़ाती हैं
इंतज़ार का दर्द क्या कम था जो इश्क मोल ले लिया?
देखो नज़र के उस पार
इमली के पेड़ों की टहनियों पर कुछ टिक-टैक-टो खुरचे हुए हैं
गर्मियों की वो दोपहरें दिखाई पड़ती हैं इन्ही पेड़ों पर से
तब जाने क्यूँ पैर नहीं जला करते थे?
और नदी पर देखो नया डैम बन गया है छोटा सा
मछली पकड़ने अब सब वहीँ जाते हैं
घरों से लगा हुआ ही एक कुआँ है
एक दिन तुम्हे ढूंढते-ढूंढते माँ ने उसमें भी आवाज़ लगा कर देखी थी
बूढ़ा कुआँ बेचारा आजकल पलट कर बात नहीं कर पाता
वहीँ कुएं की मुंडेर पर तुम्हारी बातों के सिलसिले पड़े हैं
कुएं से सटी हुई एक बगिया है
चहल-पहल के खाद-पानी में अच्छी सब्ज़ियाँ हो जाती थीं
ख़ामोशी तो बस खरपतवार जनती है
देखो नज़र के उस पार
बहुत कुछ है
खुरदुरे कम्बलों में लिपटी जाड़ों की रातें
धूल धुसरित बकरियों के झुण्ड
स्कूल के पीछे वाला क्रिकेट ग्राउंड
शाम के रंग में घुली पंछियों की हंसी ठिठोली
भूरी पहाड़ी की गुफा में सुस्ताते शंकरजी
बिस्तर के नीचे रखा यादों का बक्सा
जर्जर सहमे से घर
और कुछ गूंगी आँखें
सब उसी पगडण्डी को तकते हैं
जिसपर दौड़कर तुमने उड़ान भरी थी.

17 comments:

रश्मि प्रभा... said...

http://vyakhyaa.blogspot.in/2012/10/blog-post_18.html

सदा said...

देखो नज़र के उस पार
कुछ घर बसे हैं सहमे से
चिमनियों में से उठता धुंआ
गवाह है कि रिश्तों की गर्माहट अब भी बाकी है
वाह ... बेहतरीन भाव लिये अनुपम प्रस्‍तुति।

Anita said...

और... निगाह दूर तलक... जा के लौट आती है...~ भावपूर्ण रचना... !
~सादर !!!

Tulika Sharma said...

देखो नज़र के उस पार
बहुत कुछ है....
अच्छी प्रस्तुति

Anonymous said...

Laajawaab!! 2 baar padhi. Great work aadi :) i am so proud that I know you. Bahut khuubsurat likhte ho. Ek ek pankti bemisaal..So hard to pick one i like best.. All of them are awesome..But .. I think i picked one...*khamoshi to kharpatwar janti hai*...

-SKB

Aanchal said...

Like I said, if a poet can make the reader create a picture out of words, he has done his job. And, u, my friend, took me to the pagdandi where I was lost in my thoughts. Job well done! :)

expression said...

वाह....
बहुत सुन्दर रचना.......
अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर....

अनु

Kopal said...

woaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

Aadii said...

Thanks a lot :)

Aadii said...

Thanks :)

Aadii said...

Thanks :))

Aadii said...

Thank you di :)

Aadii said...

Thank you :)

Aadii said...

Thanks for the kind words :)

Aadii said...

Thank you so much :)

Anonymous said...

You write so touching and as if i can see the complete view from your words..AWESOME MAN :)
गवाह है कि रिश्तों की गर्माहट अब भी बाकी है
वक़्त की आंच पर पकने रखे हैं कुछ वादे :)

deepak detwal said...

बहुत उम्दा adil जी ...आपकी कवितायें अच्छी लगतीं हैं