कभी

इस कदर परेशान न रहा करो
कभी वक़्त मिले तो खुद से मिला करो

भूल गयी हैं ये आँखें चमकना
कभी किसी बच्चे संग खुल के हंसा करो

पंछी नहीं सोचते क्या सुर क्या ताल
कभी बेसुरा ही सही मगर गाया करो

माना अंधेरों से डर लगता है
कभी दर्द को भी गले लगाया करो

दुनिया का दोगुलापन खलता है सबको ही
कभी ज़रा खुद को भी आज़माया करो

रिश्तों के मांझे से उँगलियाँ लुहूलुहान हुईं तो क्या
कुछ से माफ़ी कुछ को माफ़ करते जाया करो

कितनी कमीनी ही क्यूँ न हो जायें यार राहें
कदम ज़मीन पर रख उड़ते जाया करो ~

6 comments:

sushma 'आहुति' said...

behtreen....

ऋता शेखर मधु said...

खूबसूरत!!

Anonymous said...

beautiful:)

Anonymous said...

Touching :)

Aadii said...

Thank you everyone.

keshav singh gurjar said...

dil le liya