रात हुआ शोर बहुत

रात हुआ शोर बहुत
तूफान आया ज़ोर बहुत
चीखा आसमान
थर्राई धरती
बरसी ज्वाला
गुर्रायी सी गिरती
छाती फाड़ निकली साँसें
खून में बह गयी सब यादें
बरसा था पानी बहुत
खो गये मानी बहुत
आया था लेने कोई
काली रस्सी हाथ में थामे
दो पल की मोहलत माँगी
जाने किसके इंतज़ार में थी आँखें?
हाथ बढ़ाया
जिस्म गिराया
रूह का साया
पलकों तक आया
उड़ चला आज़ाद हो
जुड़ गया सबसे वो
उड़ चला आज़ाद वो
जुड़ गया सबसे हो
रात हुआ था शोर बहुत
तूफान आया था ज़ोर बहुत
नींद खुली तो दर्द फिर जागा
ज़हन की कशमकश से है कौन भागा..



2 comments:

Anuradha Sharma said...

Kitna achha likhte ho Aadi.. :)

Aadii said...

Thank you so much di :)