बोर्नवीटा Bargain

A small poem dedicated to our childhood. How wonderful it is sometimes to escape the hassles of reality and revisit the fond memories of those times. Do share what's your favorite childhood memory in the comments. Take care.


नन्ही नज़रें जमी हुई हैं टेलीविज़न सेट पर
घड़ी की सुइयां शाम के 6:45 बता रही हैं
लेकिन मानो अभी 1 सेकेंड पहले ही शुरू हुआ हो Disney Hour
अलादीन, लिट्ल मर्मेड, टेल-स्पिन, डक-टेल्स, गमी बीयर्स,
गूफी, प्लूटो, मिकी माउस और डोनल्ड डक के कारनामे
आज टेल-स्पिन का स्पेशल एपिसोड है.

"चलो अपने कमरे में जाओ होमवर्क करना है ना खूब सारा!"
"बस 2 मिनिट ना मम्मी"
"नहीं.. थोड़ी देर पहले भी तो यही कहा था..बहुत हुआ अब चलो पढ़ने बैठो.."
"बस 2 मिनिट ना मम्मी"
"आने दो डैडी को.."

माँ ने डैडी वाला ब्रह्मास्त्र चलाया
छोटे मियाँ भी कम नहीं, पट से जवाब चिपकाया

"अच्छा मुझे मिल्क-बोर्नवीटा पीना है !"
"खुद बना लो, मिल्क अभी गरम किया है"
"आपके हाथ में मैजिक है, आप ही बनाओ ना"
"अच्छा ठीक है... पूरा पीना पड़ेगा... छोड़ा तो देख लेना !!"
"नहीं छोडूंगा ना मम्मी, अब जाओ टीवी देखने दो"

छोटे मियाँ आज फिर बहुत खुश हैं और सोच रहे हैं..
"माँ को आज फिर उल्लू बनाया झूठ पिलाया
15 मिनिट का और टाइम जो  है आया
मिल्क रेडी होने में और पीने में टाइम तो लग ही जाएगा
तब तक बलू अपनी टेल-स्पिन कराएगा... ही हा हा "

किचन में माँ खुश हो मुस्कुरा रही है.
मिल्क से हमेशा कतराने वाले छोटे मियाँ,
15 मिनट के चक्कर में मान गए.
आज फिर माँ को ज़्यादा अच्छी Bargain मिली है.

4 comments:

रश्मि प्रभा... said...

:)

Anonymous said...

Awesome Childhood :)

Anuradha Sharma said...

Absolutely loved it. So so so so so adorable. Ruko, Ek baar phir padh luun.. :)

pratik said...

jabardast :)