Sense of humor


पहले दिए पर.
फिर दी उड़ान.
फिर दी कैंची.
फिर दिया दिलासा.

पहले लिया भरोसा.
फिर लिए वादे.
फिर ली उम्मीद.
फिर ली सांस.

ज़िन्दगी..
तेरे sense of humor का जवाब नहीं.



कश्मीर




केसर की रंगत लिए सुर्ख इंतज़ारी आँखें
रातों रातों तारों से बतियाती हैं

मीठी झेलम की खारी पगडंडियाँ रुखसारों पर
अक्सर ही उभर आती हैं

रूह को गर्माता यादों का पश्मीना
क्यों तुम्हारा एहसास कराता है

किसी बुत सी टकटकी लगाये ये चिनार
मुझसे पुराना शायद इनका तुमसे नाता है

पीर पांजाल के आगोश में सिमटी ये खूबसूरत वादी
कमबख्त चिढ़ाती है मुझे कि इसका कोई है

डल झील पर इठलाता ये हँसता मदमस्त शिकारा
कितना खुशकिस्मत है कि निर्मोही है

अब तुमसे और क्या कहूं

वो सुबहें कश्मीर.. वो शामें कश्मीर..
जब तुम याद आ जाओ.