मायने


एक ख़ालीपन
क्यों पनपता है
आसपास मेरे.

घुटन सी एक
क्यों गहराती है
साँसों को भारी करती हुई.

ये ख़ालीपन
किसी Dementor की तरह
खींच लेता है सब
निचोड़ डालता है सब
न रहती खुशियाँ तब
न बचती ही हैरानियाँ हैं
एक दम मूक
ठहरे हुए पानी सा मैं
तकता जाता हूँ बस आकाश को.

धड़कन छूता हूँ अपनी
महसूस करता हूँ
न जाने कहाँ उड़ जाना चाहता है
इतनी रफ़्तार में ये दिल.

सब कुछ देखता हूँ
लेकिन कुछ नहीं देखता
सब कुछ सुनता हूँ
लेकिन सुनता हूँ बस ख़ामोशी
तभी तुम्हारा नंबर देख फ़ोन के स्क्रीन पर
आँखें चमक जाती हैं
हँस पड़ता हूँ मैं
तुम Patronus हो मेरे
तुमसे मेरी ज़िन्दगी को मायने मिलते हैं.