अजीब अदायें देखिये


अजीब अदायें देखिये इश्क की साहब
कभी होते होते हो जाता है
कभी होते होते रह जाता है
कभी खून बन रगों में दौड़ जाता है
कभी अश्क बन आँखों में ठहर जाता है
कभी बहते बहते नहीं बहता
कभी कहते कहते नहीं कहता
कभी किस्सों में कभी किताबों में
कभी सूखे गुलाबों में
कभी सांस
कभी जिस्म
कभी नज़्म
कभी एक काश बनकर
कभी बेआवाज़ आवाज़ बनकर
कभी लम्हों के दरमियाँ
कभी वक़्त के परे
न रहते रहते रह जाता है
अजीब अदायें देखिये इश्क की साहब.

3 comments:

shivani gaur said...

bahut khoobsurat

1CupChai said...

छागए दोस्त :))

Aadii said...

Thanks :)