दरमियां

ना तुम आगे बढ़े
ना मैं हाथ बढ़ा पाया
ना तुमने तोड़ी खामोशियाँ
ना मैं आसमां रंग पाया
सब्ज़ [green] ज़मीं की चाह तो थी
लेकिन पथरीले रास्तों का डर भी था
एक रिश्ता वादी के मौसमी पत्ते सा
रंग बदलते-बदलते ज़र्द [pale yellow] हो गया

दरमियां रह गए बस कुछ सूने रास्ते
जो तरसते रहे मुसाफिर को.


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