टूटते चाँद

ढूंढ़े तुझको डगर-डगर
गाँव खेड़े शहर-शहर
राती-राती बदरा-बदरा 
देखो कितना भटका है चाँद

मिन्नतें की मनाया इसे
मन्नतों से पटाया इसे
अजीब काम पे लगाया इसे
चाँद खोजने निकला है चाँद

ये विरह की वेदना जानें तारे भी
आसमां से टूटते बेचारे भी
गिरते-गिरते बन जायेंगे दुआ
कि "लौट के आएगा मेरा चाँद"

किसी छत पे होगी तू ज़रूर
मुझे भी तकती होगी तू ज़रूर
क्या तूने भी भेजा है
ढूँढने मुझे अपना कोई चाँद

इस कुएें सी रात में
मेरे दोस्त उस सूखे पेड़ पर
खिले हैं फल चाँद के
महकते मीठे हिमाचली सेबों जैसे
तेरे आने के इंतज़ार में
टूटते रहे हैं ये बरसों से
तेरे आने के इंतज़ार में
टूट के गिर गये कितने चाँद.