अभी कल ही की बात है

मोती
जब नन्ही आँखें भरा करतीं 
तो नायाब मोती झड़ा करते 
ज़िद किसी खिलौने की या 
फरमाइश किसी चॉकलेट की 
थोड़ा और टीवी देखने का अरमान
या सोते हुए
एक और कहानी सुनने का फरमान 
सोना आसान था 
रोना आसान था 
अभी कल ही की बात है.  


चूरन
जब एक बूढ़े बाबा बरगद के नीचे 
चूरन की दुकान सजाते
गाँव जब गर्मी की दोपहरी में सोता 
सब बच्चे चुपके से चवन्नियां ले, 
दबे पाँव - उड़कर - उनके पास आते
लेता इमली का चूरन कोई
कोई आम का पापड़ लेता
लेता बेर का बोरकुट कोई 
कोई अनारदाने की गोली लेता
चवन्नी के चूरन में 
करोड़ों के स्वाद पा जाते 
अभी कल ही की बात है.  


क्रिकेट
जब सचिन की सेंचुरी पर 
मैच खत्म होने से पहले ही जश्न मनाते 
और कभी गर वो जल्दी आउट हो गया 
तो टीवी बंद कर खुद बाहर खेलने चले जाते
बनते सचिन, द्रविड़, सहवाग या गांगुली 
बनाते कई हज़ार से रन एक ही मैच में 
और अगर आउट भी हो गए तो?
"मेरा बैट, मेरी डबल बैटिंग!"
गली क्रिकेट का रंग ही अपना था 
(और आखिर बैट जो अपना था)
अभी कल ही की बात है.  


त्यौहार
जब दिवाली पर अब्बा पटाखे लाते 
हम गलियों में रॉकेट-रेस लगाते 
ईद पर सारे दोस्त घर आते
अम्मी की सेवई कटोरियाँ भर-भर खाते 
पर बेस्ट तो थे सैंटा-क्लॉज़ दादू
हर क्रिसमस पर पता नहीं कैसे,
परफेक्ट गिफ्ट का करते थे जादू
मज़ेदार थे सब त्यौहार 
मज़हब की नहीं थी समझ जब 
सुकून था ज़िन्दगी में तब 
अभी कल ही की बात है. 


जवाब
जब एक छोटी सी चिट को 
- "I love you" लिख कर - 
छुपाया था माइक्रो-इकोनॉमिक्स की मोटी किताब में
और फिर कांपते हाथों से दिया था उसे 
- "पढ़ कर देखिएगा, अच्छी किताब है" - 
फिर
कितने दिन इंतज़ार किया
कितनी सदियाँ इंतज़ार किया 
अगली बार जब वो दिखी
तो मुझे देख अपनी सहेली से बात करने लगी 
उस लम्हे में अगर क़ायनात भी आ जाती 
तो मुझे उसके सिवा कुछ और सुनाई ना देता 
मीठी - जानबूझ कर थोड़ी ऊंची - आवाज़ में
कनखियों से मुझे देखते हुए उसने  कहा 
"आजकल मुझे माइक्रो-इकोनॉमिक्स बहुत पसंद आने लगा है!"
इश्क़ के इज़हार बड़े दिलचस्प हुआ करते थे 
अभी कल ही की बात है. 

1 comment:

Misha said...

That's very new writing style.. loved every bit of it :)
Sach-much, abhi kal hi ki baatein hain yeh!