यादों की रोटी


मंज़िल की तलाश में जो आये हैं 
मंज़िल क्या हम पीछे छोड़ आये हैं?

ये मंज़र जो हैं बरसते आँखों में 
इन में क्यों अब तेरे ही साये हैं?

लंबा होगा सफर ये पता था 
तेरी यादों की रोटी इसलिए साथ लाये हैं.

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