मालामाल पॉकेट


जब जेबों में पैसे नहीं थे,
तो कुछ और चीज़ें हुआ करती थीं..

कुछ कंचे हरे नीले स्लेटी
कुछ जीते हुए कुछ बदले हुए.
कुछ टॉफियों के रैपर
जो चुपके-चुपके बड़े स्वाद ले खाईं थी.
कुछ पारदर्शी रंग बिरंगे पत्थर
समंदर से जो बटोरे थे पिछले साल.
कुछ माचिसों के खोल, सहेजे हुए गलियों से
क्युंकि डाक टिकट तो सब ही बटोरते हैं.
कुछ पेन्सिल के छिलके
क्युंकि कम्पस-बॉक्स में जगह न थी.
कुछ ट्रंप कार्ड्स
WWE वाले और क्रिकेट वाले.
कुछ पेपर बुलेट और रब्बर बैंड
पॉकेट गुलेल का निशाना चूकता नहीं अपना.
कुछ फूल और कुछ पत्ते
साइन्स की फाइल में चिपकाने को.
कुछ टूटी हुई स्लेट-पेंसिल
बहुत टेस्टी लगती थी.
और
ढेर सारे बहाने
होमवर्क न करने के.

मालामाल हुआ करती थी पॉकेट कभी अपनी,
जब जेबों में पैसे नहीं थे,
तब हम कितने अमीर थे!